दिवाली 2022 लक्ष्मी पूजन दिनांक| दिवाली किस दिन है- Diwali 2022

Diwali 2022
Spread the love

Diwali 2022 आज हम दिवाली 2022 के बारे में बात करने जा रहे की 2022 में दिवाली किस दिन को है और आपको दिवाली की तैयारिया किस प्रकार से करनी है आज हम आपको दिवाली लक्ष्मी पूजन का महत्व और दिवाली की विशेषताओं के बारे में जानकारी देने वाले है| क्या आप जाने है की भारत के साथ पूरी दुनिया में दिवाली का त्यौहार क्यों मनाया जाता है और दिवाली के दिन ऐसा क्या हुआ था की इस दिन को खुशियों का दिन कहते है क्यों हम दीपक जलाते है और क्यों हम लोग इस दिन फटाके जलाते है चलिए जानते है|

Diwali 2022

दोस्तों वर्ष 2020 और 2021 भारत और विश्व के लिए बहुत ही मुश्किल भरे वर्ष है, हमने हमारे जीवन में इसी खतरनाक बीमारियाँ कभी नहीं देखि थी, किन्तु अचानक से ऐसा कुछ घटित हुआ की पूरा विश्व सन रह गया हम बात कर रहे है कोरोना वायरस की जो की एक जटिल समस्या के रूप में हमने झेली है और अभी भी इस बिमारी का सामना हम कर रहे है, लेकिन 2022 में हम कोरोना को कुछ हद तक ख़त्म कर चुके है

दिवाली का त्यौहार (Diwali 2022)

साल 2019 में केंद्र सरकार ने अयोध्या में राम मंदिर के फेसले पर मुहर लगा दी हे और राम मंदिर बनाने के लिए परमिशन दे दी है जिससे हम दिवाली का त्यौहार और भी अच्छी तरह मना सकते है क्यों की श्री राम से दिवाली का बहुत पुराना सम्बन्ध है |

श्री राम से जुड़े तथ्य:- रामायण में केकई द्वारा अपने पुत्र को अयोध्या का राजा मनाने के लिए राजा दशरत से दो वर मांगे गए थे जिसमे प्रथम था की अपने पुत्र को अयोध्या का राज दिया जाए और राम के बड़े पुत्र को चौदह वर्ष तक बनवास भेज दिया जाए और इसी प्रकार श्री राम को को अयोध्या छोड़कर बनवास जाना पड़ा|

जब श्री राम के चौदह वर्ष पूरे हो गए और श्री राम अयोध्या में आये तो अयोध्या वासियों से इस दिन को दिवाली नाम दिया और तभी से उस दिन को दिवाली का नाम दिया गया, कुछ और भी तथ्य हे जिनके बारे में भी आपको जानकारी होनी चाहिए|

दिवाली पर माता लक्ष्मी की पूजन का महत्त्व?

अगर सतयुग की बात करे तो दिवाली का त्यौहार प्राचीन काल से मनाया जा रहा है, जब देवता और राक्षसों जे बीच में कई दिनों तक के कठोर समुन्द्र मंथन किया गया था तो श्री विष्णु भगवान द्वारा कार्तिक अमावस्या के दिन समुन्द्र मंथन में देवी लक्ष्मी प्रकट हुई और माँ लक्ष्मी से धन-धान्य के लिए आशीर्वाद मांगे थे तभी से दिन माँ लक्ष्मी को पूजा जाता है|

दिवाली की विशेषता

दिवाली की विशेषता: आज इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको  दिवाली का त्यौहार हमें इस बात की सीख देता है की हमारे जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किल घडी क्यों न आये लेकिन हमें अपनी इमानदारी और सत्य से का ही मुह नहीं मोड़ना चाहिए और सुख दुःख दोनों को जीना चाहिए क्योंकि जीवन में यही दो पहलु से जो मनुष्य की परीक्षा लेता है और जो इसमें सफल हो जाता है उसी इस संसार में मानव जीवन का सुख भोग पाता है| और अपने सुखद जीवन का निर्वहन करता है|

मनुष्य स्वय अच्छे बुरे का अनुमान नहीं लगा सकता उसी प्रकार जब लंका के राजा रावण की मति भगवान ने हर ली थी उसी प्रकार जब आप गलत रास्ते पर चलने लगते हो तब भगवान आपको कई बार सचेत करता ही आप सही रास्ते पर आये किन्तु आप उसे समझ नहीं पाते है सही गलत में फर्क नहीं कर पाते, और और व्यक्ति अपनी गलतियों की सीमा पार करने लगता है और अंत समय में राम याद आते है कही न कही राम को सत्य का आधार माना जाता है क्योंकि जब व्यक्ति साईंया पर रहता है तब राम राम का जाप करना पड़ता है और वही अंतिम सत्य माना गया है|